Sahitya Sangeet

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नानी (Maternal Grandmother)

(१९६८)

कोलकाता (नोईहाटी, मादराल)


मैं इस साल १४ साल पूरा करने वाला था।
दुर्गा पूजा की छुट्टी ख़तम हो चुकी थी और स्कूल कालेज सब शुरू हो चुके थे।
मंगलवार का दिन था। स्कूल में लंच टाइम चल रहा था।
घर का माली मुझे ढूंढ़ते हुए कैंटीन में आ गया। 

मैं :- क्या हुआ रामुदा, अचानक यहां ?
रामुदा :- कुछ देर पहले मादराल से फ़ोन आया था कि आपकी नानी की तबियत बहुत ख़राब है और डॉक्टर ने जबाब दे दिया है। आपकी दादी के अलावा सभी मादराल चले गए। दादी जी ने आपको तुरंत घर पे बुलाया है। 
मैं :- रुको मैं छुट्टी लॉकर आता हूँ। 
आधे घंटे में घर पहुँच गया। 

 

दादी ने कहा थोड़ा कुछ खालो और तुरंत तुम भी मादराल चले जाओ। 
मैं कपडे वगैरह बदल कर तुरंत निकल पड़ा सियालदह स्टेशन को। 
अब यहां संछेप पे थोड़ा जानकारी देना जरुरी है। 


मैं कोलकाता में भवानीपुर का रहने वाला हूँ। भवानीपुर २४ परगना हावड़ा स्टेशन के पास है। 
मेरा ननिहाल मादराल में है।
मादराल जाने के लिए सियालदह स्टेशन जाना पड़ता है। वहां से ट्रैन से नैहाटी स्टेशन जाना पड़ता है। नैहाटी स्टेशन से साइकिल रिक्शा से मादराल जाया जा सकता है। 


मेरी दादी घर से मंदिर के सिवा और कहीं भी आती जाती नहीं थी। 


मैं जब घर से रवाना हुआ उस समय शाम के ५ बजकर ३० मिनट हो रहे थे। 
सियालदह से जब मैं नैहाटी पहुंचा शाम के ७ बज रहे थे।  अँधेरा हो चूका था और बारिश भी शुरू था।

जब स्टेशन से बाहर निकला तो देखा श्यामल अपने दुकान पर बैठा है।


नानाजी के फार्म हाउस में श्यामल के पिता देख रेख का काम करते थे।


श्यामल मुझे देखते ही हंसा और नमस्कार में हाथ जोड़ दिया।


श्यामल :- इतनी रात को छोटे बाबू ?
मैं:- तुम तो दुकान में हो , इसलिए तुम्हे पता नहीं। नानीजी की तबियत बहुत ख़राब है। इसलिए मैं वहीं जा रहा हूँ। तुम कब चलोगे ?


श्यामल:- ओह ! मुझे बहुत दुःख हुआ सुनकर। लेकिन आज मैं घर नहीं जा पाउँगा। आज दुकान के ऊपर पतरी लगाना था। लेकिन पतरी वाला पैसा लेकर भी नहीं आया। बारिस जोर पे है , अगर ऊपर से पानी टपकना शुरू हुआ तो सब सिगरेट,बीड़ी और बाकि सामान भीग कर ख़राब हो जायेगा। भारी नुकसान  हो जायेगा। इस समय आपको रिक्शा भी नहीं मिलेगी। मैं क्या कहता हूँ कि, आप मेरा साइकिल , छतरी और टोर्च ले लीजिये और चले जाइये। आप का जाना बहुत जरूरी है।


मुझे भी यह सलाह सठीक लगी थी।


लेकिन मुश्किल से १ मिनट की दुरी तय किया ही था कि साइकिल का पिछ्ला पहिया पंचर हो गया।
मैं वापस आकर श्यामल को साइकिल वापस कर दी और छतरी एवंग टोर्च लेकर पैदल ही चल पड़ा।


नानीजी मुझे बहुत प्यार करती थी।
यही सब सोचते हुए काफी दूर निकल आया। दूर पर धुंदले में से  मोहल्ला दिखाई देने लगा था।
टोर्च की बैटरी भी ख़तम हो चुकी थी । 

चूँकि मोहल्ला दिखाई देने लगा था, मैं जल्दी जल्दी चलने लगा।


जब और पास पहुँच गया तो देखा खेत में लालटेन और छतरी लेकर कोई इधर उधर घूम रहा है।
सोचा चलो कोई इंसान तो दिखाई पड़ा इतनी देर बाद।
और पास पंहुचा तो मालूम पड़ा ये तो कोई औरत है और नाना जी के खेत में घूम रही है।


जब एकदम पास पहुंचा तो देखा अरे ये तो कमला मौसी है।
कमला मौसी की मां नानी जी के घर में घरकाम करती थी और रहती भी वंही थी, विधवा थी।
१५ साल की उम्र में उसने कमला मौसी की शादी कर दी।
१९ साल की उम्र में कमला मौसी विधवा हो गई।
कोई आगे पीछे नहीं , ससुराल वालों ने उसे नहीं रक्खा ससुराल में , तो वह कहाँ जाती , रोती पीटती नानी जी के पास आ गई।
उस समय विधवा की शादी तो होती नहीं थी , इसलिए नानी जी ने कहा , "तू इधर अपनी मां की तरह ही रहेगी"।
तब से कमला मौसी नानी जी के पास ही रहती थी। । मुझे बहुत प्यार करती थी। 


मैं ने कहा कमला मौसी इतनी रात को बारिस में खेत में क्या कर रही हो ? इस समय वो उम्र ६२ वर्ष पार कर चुकी थी। 
उसने मुझे देखा , आंख में बारिस का पानी था या आंसू , मुझे उस समय समझ में नहीं आया था। 

 

मुझे देखकर रोने लगी।
और कहा "बाबू तू आ गया। जा घर पे जा। तेरी नानी नहीं रही रे।
मैं भी रोने लगा।
तो उसने कहा कि बारिस में खेत का किनारा देख कर आती हूँ , तू जल्दी जा।

मैं रोते हुए नानी के घर पे पंहुचा।
नानी का मृतदेह बैठक घर में रखा था।
मैं बेतहासा रोने लगा।
माँ,पिताजी,मां,मामी,मौसी सब मुझे प्यार से सांत्वना देने लगे।
हलाकि वो सब भी रो रहे थे।

थोड़ी देर बाद कुछ शांत होने के बाद मुझे पानी पिलाया गया।
बड़े मामा ने पूछा, क्या रे रंजन तुझे डर नहीं लगा इतनी बारिश और अँधेरे में अकेले आने में ?
मैंने कहा "डर किस बात की ! एक ६२ साल की औरत रात में खेत देखने जा सकती है , तो मुझे क्या ?"
मामा ने पूछा "कौन ६२ साल की औरत ?"
मैंने कहा "कमला मौसी ,और कौन?"


मां, मामी,मौसी सब दौड़ कर मेरे पास आ गई और मेरे सर पे पीठ पे हाथ फेरने लगी और सब पूछने लगी,,,,,,,,
"तू ठीक है ना ? कुछ डर या कुछ अलग अलग सा तो नहीं लग रहा है ?"
मैंने कहा "ऐसा क्यों कर रही हो तुम लोग, क्या ऐसा हो गया ?"


बड़े मामा ने कहा "तेरी नानी का स्वर्गबास शाम को ६-20 बजे हुई, और तेरी कमला मौसी दोपहर ३-५० बजे गुजर चुकी I "
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