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त्योहार(Festival)

 

 

 


हम बहुत भोले हैं,
आँखों पर आश्वासनों की,
पट्टी बांध रखी है।
दया है मार्गदर्शकों की,
हमें खबर नहीं, कहाँ
"हम जा रहे है"

 


एक ही तो त्योहार है,
पहले सालों बाद,,,,
अब अक्सर आ जाता है।
घसीट लिया जाता है हमें ,
उस त्योहार में,
यह कहकर,
सुनहरे भविष्य की ओर,
"हम जा रहे हैं"

 


अब भी वक़्त है,
फेंक दो,
सुनहरे अस्वासनों की पट्टी ,
फिर देखो -------
"हम कहाँ जा रहे हैं ?"
-----------

 

(IF YOU ASK ANY COMM0N PEOPLE ABOUT IDENTITY, "I AM YOUR COMPATRIOT", REPLY WILL BE. BUT IF YOU ASK A LEADER THE SAME QUESTION, "I AM YOUR LEADER", HE WILL REPLY. BUT STILL WE DO NOT KNOW WHO IS LEADING US. LET US BE VIGILANT.)

 

Rabindra Nath Banerjee(Ranjan)