Sahitya Sangeet

Literature Is The Almighty & Music Is Meditation

शोर (Noise)

 

 


इस भयानक शोर में ,


जिसकी ताक़त दिन ब दिन ,


बुलंदी की ओर जा रही है ,


मुझे अपनी ही आवाज़ ------


अपरिचित सा लग रहा है।


आप मेरे परिचित है ,


आपको शिकायत है कि !


मैंने मुड़ के देखा ही नहीं था ,


आपके पुकारने पर।


क्या आप जोर देकर कह सकते हैं कि ,-------


अपने मुझे पुकारा था ! नहीं।


अपने जरूर पुकारा होगा ,


कई बार पुकारा होगा ,,


लेकिन मुझे नहीं , शोर को।।


क्षमा कीजिये ,


मुझे चुप रहने दीजिये।।


मैं शोर को बढ़ने में , मदद ,


नहीं कर सकता।
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(WHY WE ARE NOT SERIOUS ABOUT NOISE POLLUTION. WE MUST NOW. OTHERWISE, IN THE FUTURE, DEAFNESS AND HEART AILMENTS WILL PUNISH US..)

 

By Rabindranath Banerjee(Ranjan)