sahitya Sangeet

(Literature Is The Almighty & Music Is Meditation)

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जीना मरना (Survival And Perish)





मैंने पेड़ों को काटा है,


मुझे धूप में--------


झुलसने दो ;


तुम धूप में खड़े रहोगे -----


तो.


अपराध भावना से मैं------


जी न सकूँगा !!!


मैंने कुछ भी नहीं पाया ????


जीवन भर,,


उसके प्रतिकार में तुम,,,


खोना चाहते हो ?


मुझमें न पाने का आक्रोश ----


और बढेगा,और मै,


मर ना सकूंगा !!!!!

 


( FOR MANY IN THIS WORLD,UNCALLED SYMPATHY IS LIKE A DEATH BLOW.AND THEY ARE READY TO SUCCUMB QUIETLY WITHOUT BEING RECOGNISED.FOR THEM WHO THINK THIS WORLD IS THE BUSINESS OF GIVE AND TAKE IS WRONG. BECAUSE IT IS NOT.)
_____


रबीन्द्रनाथ बनर्जी ( रंजन )