Sahitya Sangeet

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Mirza Ghalib

हम कहाँ जा रहे हैं (Are We On The Right Track)



उफ़ ये जलन, उफ़ ये धुवां ,
क़ायनात है जल रहा ,
पखेरू भी हैं चिंतित,
घर क्यों उजड़ रहा ,
और हम आधुनिकता के मोह में,
प्रतिद्वंदिता के होड़ में ,
प्रकृति के देंन  को विध्वंग्स किये जा रहे हैं !

किसान कारखाने के धुंए को ,
बादल समझ रहा है ,
कुम्हार कारखाने के गरल को,
पानी समझ रहा है,
और हम मरनाशत्र क्षेपित कर ,
प्राणियों को मार कर,
प्रकृति के देन को विध्वंग्स किये जा रहे हैं !!

बादल रूठ गए हैं यूँ ,
वृक्ष कट रहे हैं ज्यूँ ,
नदियां हैं सिकुड़ रही ,
समुन्दर है फ़ैल रहा ,
हिमाद्रि का हीम पिघल रहा ,
और हम शीतल कमरों में बैठ ,
चर्चा कर रहे ,
आने वाले कल का,
विचार कर रहे,
और प्रकृति के देन को विध्वंग्स किये जा रहे हैं !!!

 

(EVERY NATION IS TALKING ABOUT GLOBAL WARMING, BUT NOT A SINGLE NATION IS DOING SOMETHING CONCRETE.)

 

By Rabindra Nath Banerjee(Ranjan)

 

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