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(११)

उनकी एक झलक ले आई है 'रंजन' पे रंगत,
तबीब ने समझा उसका दवा कारगर निकला !


(१२)
हलक तक ज़हर दे फरमाइश है तरन्नुम का,
ज़हर भी शरमा गया उनकी इस अदा पे 'रंजन' !


(१३)
हलक में चीख होठों पे हंसी माजरा क्या है,
कोई बताये हमें ये की मूद्दआ क्या है !


(१४)
'रंजन' तेरे दिल की कीमत क्या है इस दुनिया में,
जिसने कल लिया था वो वापस आज ले आया !


(१५)
मेरा तुम्हारा फैसला होगा खुदा के सामने,
तुमने भी तैग खींच ली हमने भी सर झुका दिया !


(१६)
क्यूँ दुनिया भर की उलझन में उलझा है 'रंजन',
न आना है मर्जी में न जाना इख्तियार में !


(१७)
हम 'रंजन' से कहते हैं अब तो बाज आ जाये,
जिसने किया तबाह वही दीवाना कहते हैं !


(१८)
राह कभी ना पंहुचा मंजिल तलक,
'रंजन' चलता ही रहा चलता ही रहा !


(१९)
साकी के चश्म-ए-गफलत नज़रों में खोया रहा,
जब तलक जाम आए 'रंजन' मदहोश हो गया !


(२०)
उठ कर चल दिया उनकी गली की ओर,
'रंजन' काशिद को आने तो दिया होता !

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