sahitya Sangeet

(Literature Is The Almighty & Music Is Meditation)

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Couplets-12




(111)
ओ शेख-बर्महन तुमसे और सबाब का ख्वाहिश ,
हम नंगे हैं और गौर करो अपने-अपने अबा पर !
(112)
इस गर्दिश से अब कहीं दूर जा निकलना है ,
ये कहाँ अबाबीलों में आ फंस गया था मैं !
(113)
मेरे किसी रकीब से कहो आकर अब्रू संवार दे ,
शायद नादानी में वो तलवार से खेलने लगे !
(114)
कभी भी आ जाना पते को क्या पूछते हो ,
दर-ओ-दीवार हो तो एक पता भी हो !
(115)
अमल की राह पे चलता रहा ता ज़िंदगी 'रंजन' ,
किसी ने रोका ही नहीं और मंजीले जाती रही !
(116)
"रंजन' को क्यों सम्हलकर फिरने को कहते हो ,
ये अमानत है मौत की उसीको सम्हालने दो !
(117)
मेरे रहनुमा लो मै फिर से आ गया खोंज में तेरे ,
फिर से तूने मुझे गलत मंजिल पे क्यूँ छोड़ा था !
(118)
जंग दोजख में हो या फिर ज़न्नत में 'रंजन' ,
रिजवान तो खबर लेने वाला कारोबार से !
(119)
दिल से दिल न मिलाया तुमने करम मेरा येही सही ,
हाथ हमेशा मिलेगा तुमको जब समझो मांग लेना !
(120)
ये क्या बात हुई रकीब से मेरा खबर पूछना ,
हुनर हमने भी तेज़ किया है ऐसे ऐब करने को !

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