Sahitya Sangeet

Literature Is The Almighty & Music Is Meditation

Hindi Couplets Page-18

 

 

 

171.

आज क्युँ रोते हो ज़ार-ज़ार उसकी याद में हूर जमाल ,
जब ज़िंदा था तब तो मुसीबत लगा करता था सादा "रंजन।

172.
आवाज-ए-पा है कि झोंका-ए-हवा है फरक क्या पड़ता है,
"रंजन" को तो हर बार उठकर दरवाजा खोलना पड़ता है।

173.
फकीरों की हुज़ूरी के लिए तो चला ही जाता है "रंजन",
जाओ तुम हूर-ओ-मलक जन्नत तुम्हे मुबारक़ मुबारक़।

174.
हुस्न और जन्नत दोनों ही अजीब शै है अब जाना है "रंजन",
इसके पीछे दौड़ो तो वो नहीं,उसके चक्कर में पड़ो तो वो नही।

175.
कैसे मान लूँ कि मैं एक ऐबों का खजाना हूँ "रंजन",
दैर-ओ-हरम का दरवाजा मुझे कभी बंद मिला ही नही।

176.
आज वो आये मेरे दर पे खुदा का शुक्र,
अरसे बाद हुस्न-ए-तलब का असर "रंजन।

177.
जिस तरफ से गुज़रा हर दरवाजा बंद मिला,
मेरी झोली रात तलक कभी ख़ाली न रही "रंजन।

178.
तलाश में निकला हूँ मंजिल तलक आराम कहाँ,
ये बात अलग है रास्ता कभी ख़तम न हुआ "रंजन" का।

179.
खत मिला, क्या कहिये नायाब हुस्न-ए-अदा को "रंजन",
आप ख़ास हैं, किसी खास से आपको मिलाने की रज़ा है।

180.
अभी से हाय तौबा थोड़ा सब्र तो रखिये हुज़ूर,
आता है मक़्तल से जल्लाद को डराकर "रंजन।

 

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