Sahitya Sangeet

Literature Is The Almighty & Music Is Meditation

Hindi Couplets Page- 16

 

 


151.
हस्ती को मिटाने चला है "रंजन",
हौसला अफ़ज़ाई कर क़ातिल।।

152.
तू बेवफाई कर रुस्वा कर कुछ भी कर ,
"रंजन" के पास से न जा ऐ चश्म-ए-गफलत।।

153.
पहले हौसला से तो नवाज़ दे ऐ परवरदिगार ,
फिर चाहे जितना ग़म नज़र कर गरीब "रंजन" को।।

154.
वो हौवा है तो हुआ करे , वो आदम है तो हुआ करे ,
"रंजन" क्यों डरे उनसे , घसीटा यहां उनने ही तो है।।

155.
इस बहार में इस साल कोई फूल खिल पायेगा क्या ,
हौल नाक है मंजर इस कारोबार का इस बार "रंजन।।

156.
ये तो हश्र है घबराता है क्यों मासूम मुफ़लिस "रंजन",
अभी तो शुरुआत है कहानी का, अंजाम अभी दूर है।।

157.
अक्सर शराबखाना कुछ देर बाद बदल जाता है "रंजन",
क्यों मुझे बाद में वो हौज़-ए-क़ौसर नज़र आता है।।

158.
होश-ओ-हवास जब तक सलामत है ,सलामत है "रंजन",
वार्ना क़ातिल का क्या , निशाना तो कोई भी चूक सकता है।।

159.
बुत-ए-होशरुबा रहम कर रहम कर इस गरीब "रंजन" पर ,
अभी अभी तो वो सादा इंसान परश्तिश में रुज़ू हुआ है।।

160.
किस क़दर जलाया ता ज़िंदगी ग़मग़ुसारों ने "रंजन" को ,
अब वो शम्मा की लौ से घबराया हुआ घूमता भागता है।।

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